मुजफ्फरपुर: मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस के झा ने एक अनोखी और चौंकाने वाली कार्रवाई की है। उन्होंने दरोगा रामचंद्र सिंह के जीवित रहते ही उनका हिंदू रीति-रिवाज से गयाजी में श्राद्ध कर दिया। ये वही दरोगा हैं जिन्होंने करीब 14 साल पहले एक रेप केस में खुद को फंसा देख कोर्ट में अपनी मृत्यु का प्रमाण पत्र जमा कर खुद को मृत साबित कर दिया था।
यह मामला साल 2012 का है। मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र के नूरी गांव में सरकारी स्कूल के शिक्षक अनंतराम पर झूठे रेप केस दर्ज हुए थे। इस केस की जांच दरोगा रामचंद्र सिंह को सौंपी गई थी। रामचंद्र सिंह ने जांच रिपोर्ट में शिक्षक पर आरोप दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। जब अदालत ने उन्हें गवाही के लिए तलब किया, तो उन्होंने अपनी पत्नी की मदद से कोर्ट में अपनी मौत का सर्टिफिकेट जमा कर दिया। सर्टिफिकेट में उनकी मृत्यु की तारीख 15 दिसंबर 2009 बताई गई थी, जबकि उन्होंने 2012 में केस की जांच की थी।
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अधिवक्ता एस के झा ने इस झूठ का पर्दाफाश किया। हाई कोर्ट ने मामले की समीक्षा के बाद शिक्षक अनंतराम को सभी आरोपों से बरी कर दिया और उनकी नौकरी भी बहाल कर दी। एस के झा ने कहा कि उन्होंने संकल्प लिया था कि तब तक जनेऊ धारण नहीं करेंगे जब तक रामचंद्र सिंह की सच्चाई सामने नहीं आती। 12 साल बाद उन्होंने दरोगा का वीडियो जारी कर संकल्प पूरा किया और गयाजी में उनका श्राद्ध किया।
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अधिवक्ता ने यह भी बताया कि दरोगा रामचंद्र सिंह आज भी जीवित हैं और पटना में रह रहे हैं। बावजूद इसके, पुलिस विभाग ने अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है।