पटना: बिहार की सरकार इन दिनों पर्यटन को बहुत ही अधिक बढ़ावा दे रही है और इसी कड़ी में एक और एतिहासिक पर्यटन स्थल की खोज को आधिकारिक स्वीकृति मिल गई है। यह एतिहासिक और पुरातात्विक स्थल है बिहार के मधुबनी में जहां अब ASI ने खुदाई कर दो हजार वर्ष पूर्व इतिहास खोजने की अनुमति दे दी है। यह खुदाई ASI के पटना सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ हरि ओम शरण के निर्देशन में कराया जायेगा। इस उत्खनन कार्य में नियमो और दिशा निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा।
यह स्थल है करीब दो हजार वर्ष असुरों के राजा बलि की राजधानी 'बलिराजगढ़' जिसकी खोज में अब उत्खनन कार्य किया जायेगा। इस स्थल पर खुदाई की अनुमति राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और ASI के महानिदेशक से लगातार बातचीत के बाद मिली है। संजय झा परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने बलिराजगढ़ को एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने में विशेष रूचि दिखाई और उसकी का फल है कि अब इस स्थल पर खुदाई जल्द ही शुरू की जाएगी।
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मधुबनी जिले के बाबूबरही प्रखंड क्षेत्र में स्थित बलिराजगढ़ जो कि करीब एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। कहा जा रहा है कि इस जगह पर असुरों के राजा बलि की राजधानी थी जहां 1962 से 2014 के बीच खुदाई में शुंग-कुषाण काल (लगभग 200 ईसा पूर्व) से लेकर पाल काल अटक के अवशेष मिले हैं। यहां से नोर्दर्न ब्लैक पोलिश्ड वेयर, टेराकोटा मूर्तियाँ, तांबे के सिक्के, पत्थर के मनके और लोहे की वस्तुएं बरामद हुई है। विशेस रूप से पकी ईंटों से बनी विशाल सुरक्षात्मक दीवार और पक्की नालियों के अवशेष मिले हैं। ये लगभग 2000 वर्ष पुराने उन्नत शहरी नियोजन के संकेत देते हैं। इस जगह के पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किये जाने से मिथिला की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
ASI ने इस स्थल को 1938 में संरक्षित स्थल घोषित किया था। इस स्थल की खुदाई के दौरान प्राप्त प्राचीन वस्तुओं की विस्तृत सूची संबंधित कार्यालय को सौंपना होगा और क्षेत्रीय आर्य पूरा होने के तीन महीने के अंदर विस्तृत रिपोर्ट महानिदेशक को प्रस्तुत करनी होगी। लोकमान्यताओं के अनुसार यह असुर राजा बलि का गढ़ था, जो अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध थे।
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