राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए बड़ा फैसला लिया है। वित्तीय वर्ष के समापन से पहले खर्चों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से 10 मार्च तक वेतन, पेंशन और अन्य अनिवार्य मदों को छोड़कर सभी प्रकार के भुगतानों पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। इस निर्णय से सरकारी विभागों में भुगतान प्रक्रिया पर तत्काल असर पड़ेगा।
इस संबंध में वित्त विभाग के विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल ने शुक्रवार को विस्तृत निर्देश जारी किए। यह पत्र सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, विभागीय सचिवों, विभागाध्यक्षों, प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों, कोषागार पदाधिकारियों और आहरण एवं व्ययन पदाधिकारियों को भेजा गया है। निर्देश में साफ कहा गया है कि भुगतान प्रक्रिया में पूरी सतर्कता और सख्ती बरती जाए।
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वित्त विभाग के अनुसार हर वर्ष वित्तीय साल के अंतिम महीनों में कोषागारों पर बिलों का दबाव अचानक बढ़ जाता है। बड़ी संख्या में भुगतान प्रस्ताव एक साथ आने से कई मामलों का समय पर निपटारा नहीं हो पाता। इससे वित्तीय प्रबंधन प्रभावित होता है और अनियमितताओं की आशंका भी बढ़ जाती है। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यह अस्थायी रोक लगाई गई है।
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सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल वेतन, पेंशन और अत्यावश्यक खर्चों का भुगतान जारी रहेगा। अन्य मदों में भुगतान तभी होगा जब वह स्वीकृत बजट प्रावधान और वित्तीय नियमों के अनुरूप हो। विभागों को पहले भी वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की सलाह दी गई थी, लेकिन इस बार निर्देशों के कड़ाई से पालन पर विशेष जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वित्तीय वर्ष के अंत में अनियंत्रित खर्चों पर रोक लगाने और बजट संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा। फिलहाल सभी विभागों को तय समय तक खर्चों पर संयम बरतने के निर्देश दिए गए हैं।