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महागठबंधन को मिल सकता है AIMIM का साथ, तेजस्वी–AIMIM की बैठक, 48 घंटे में ओवैसी का फैसला

बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। तेजस्वी यादव और AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान की पटना में हुई बंद कमरे की बैठक के बाद सियासी समीकरण बदलने के संकेत मिल रहे हैं।

The grand alliance may get the support of AIMIM
महागठबंधन को मिल सकता है AIMIM का साथ, तेजस्वी–AIMIM की बैठक, 48 घंटे में ओवैसी का फैसला- फोटो : Darsh NEWS

बिहार की राजनीति में इन दिनों शतरंज की बिसात बिछी हुई है। हर चाल के पीछे गणित भी है और संदेश भी। राज्यसभा चुनाव की इस सियासी बाज़ी में अब निगाहें उस फैसले पर टिक गई हैं, जो आने वाले 48 घंटे में पूरे खेल की दिशा तय कर सकता है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव और AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान के बीच पटना में हुई बंद कमरे की बैठक ने राजनीतिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। करीब एक घंटे तक चली इस बातचीत में राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

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सूत्रों के मुताबिक बैठक का माहौल सकारात्मक रहा। दोनों नेताओं ने बदलते सियासी समीकरणों पर विचार करते हुए इस बात पर सहमति जताई कि भाजपा के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों के बीच समन्वय जरूरी है। सीमांचल क्षेत्र के विकास और वहां की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों पर भी बातचीत हुई, जिसे AIMIM लंबे समय से उठाती रही है। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में अख्तरुल ईमान ने कहा कि चर्चा सकारात्मक रही है और पार्टी नेतृत्व को पूरी जानकारी दी जाएगी। अंतिम निर्णय AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ही लेंगे। पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श जारी है और अगले दो दिनों में स्थिति साफ होने की संभावना है।

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दरअसल, बिहार से राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। एनडीए चार सीटों पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है, जबकि आखिरी सीट के लिए वोटों का गणित काफी नाजुक है। ऐसे में AIMIM के पांच विधायकों का रुख निर्णायक साबित हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर AIMIM महागठबंधन के पक्ष में खड़ी होती है, तो विपक्ष की उम्मीदों को नई ऊर्जा मिल सकती है। लेकिन यदि फैसला अलग दिशा में जाता है, तो बिहार की सियासत में एक नया मोड़ भी देखने को मिल सकता है। अब सबकी नजरें उस फैसले पर हैं, जो आने वाले 48 घंटे में होगा—क्योंकि कभी-कभी राजनीति में एक छोटा-सा समर्थन भी पूरी बाज़ी पलट देता है।


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