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लेबर कोड के खिलाफ हड़ताल की गूंज से थमी रफ्तार! पूर्वी चम्पारण और जहानाबाद में चक्का जाम

देशभर में चार लेबर कोड के खिलाफ बुलाए गए एक दिवसीय हड़ताल का असर बिहार में भी दिखा।

The strike against the Labor Code slowed the pace! Road bloc
लेबर कोड के खिलाफ हड़ताल की गूंज से थमी रफ्तार! पूर्वी चम्पारण और जहानाबाद में चक्का जाम- फोटो : Darsh NEWS

देशभर में चार लेबर कोड के विरोध में आहूत एक दिवसीय हड़ताल का असर बिहार के कई जिलों में साफ नजर आया। पूर्वी चम्पारण और जहानाबाद में मजदूर संगठनों और ऑटो चालकों ने काम बंद कर सड़कों पर उतरते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। दोनों जिलों में यातायात प्रभावित रहा और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पूर्वी चम्पारण जिले में ऑटो संघ से जुड़े चालकों ने सुबह से ही जिला मुख्यालय समेत शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर केंद्र सरकार के नए श्रम कानूनों के खिलाफ नारेबाजी की। कई मजदूर संगठनों ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया, जिससे शहर की रफ्तार थम गई।

ऑटो चालकों का कहना है कि नए लेबर कोड मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं और इससे उनकी रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। साथ ही उन्होंने नगर निगम और नगर परिषद पर ऑटो और ई-रिक्शा चालकों से अवैध वसूली करने का आरोप लगाया। चालकों ने कहा कि उनसे तरह-तरह के शुल्क तो लिए जाते हैं, लेकिन बदले में न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही कोई तय स्टैंड। इसके बावजूद कार्रवाई और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से सुविधाएं उपलब्ध कराने और अवैध वसूली पर रोक लगाने की मांग की। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

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वहीं जहानाबाद में ट्रेड यूनियन के आह्वान पर मजदूरों ने एक दिवसीय हड़ताल कर पांच सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। शहर के अलग-अलग इलाकों से जुटे मजदूरों ने संगठित होकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिव शंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार लगातार मजदूर विरोधी कानून ला रही है, जिससे श्रमिक वर्ग की हालत और खराब हो रही है। उन्होंने बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को गंभीर समस्या बताया।

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मजदूरों ने चारों लेबर कोड को वापस लेने, रोजगार गारंटी योजना को प्रभावी रूप से लागू करने, किसानों को मुफ्त बिजली देने, तथा आशा, आंगनबाड़ी सेविका और रसोइया जैसे ठेका कर्मियों को स्थायी कर उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन संगठनों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।


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