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अनकहे शब्दों की ताकत: अमृता सागर की किताब बना रही है साहित्य में नई पहचान

Amrita Sagar's book is creating a new identity in literature

बिहार के गोपालगंज जिले से निकलकर एक युवा लेखिका आज साहित्य की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। अमृता सागर की नई पुस्तक ‘द वेट ऑफ अनसेंट लेटर्स’ इन दिनों पाठकों के बीच तेजी से चर्चा में है। यह किताब उन भावनाओं की बात करती है, जिन्हें लोग महसूस तो करते हैं, लेकिन कह नहीं पाते। यह कृति उन पत्रों की तरह है, जो कभी भेजे नहीं गए, लेकिन दिल में हमेशा जिंदा रहे। इसमें अनकहे शब्द, अधूरे रिश्ते और दबे हुए जज़्बात बहुत सादगी से सामने आते हैं। अमृता सागर की भाषा सरल है, लेकिन असर गहरा छोड़ती है। उनकी लेखनी किसी बड़े शोर की तरह नहीं, बल्कि एक शांत आवाज़ की तरह पाठक के मन में उतरती है।

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पुस्तक पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे लेखक खुद पाठक से संवाद कर रही हों। हर पन्ना किसी न किसी अनुभव से जुड़ा दिखाई देता है। कहीं प्रेम की झलक है, कहीं बिछड़ने का दर्द, तो कहीं माफ कर देने की ताकत। यह किताब बताती है कि टूटना जीवन का अंत नहीं, बल्कि खुद को समझने की शुरुआत हो सकती है। अमृता सागर का मानना है कि अच्छा लेखन उम्र से नहीं, बल्कि सच्चे एहसास से जन्म लेता है। उनकी सोच और संवेदनशीलता इस पुस्तक में साफ दिखाई देती है।

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गोपालगंज जिले के कुचायकोट थाना क्षेत्र के लोहरपट्टी जलालपुर गांव की रहने वाली अमृता सागर आज अपनी लेखनी से न सिर्फ अपने गांव और जिले, बल्कि पूरे बिहार का नाम रोशन कर रही हैं। ‘द वेट ऑफ अनसेंट लेटर्स’ उन सभी पाठकों के लिए खास है, जिन्होंने कभी दिल से कुछ लिखा, लेकिन भेज नहीं पाए। यह पुस्तक उन्हें अपनी कहानी जरूर लगेगी।



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