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नीतीश सरकार के अधूरे वादों से नाराज, जीविका कर्मी प्रदर्शन पर

Jivika workers protest against Nitish government's unfulfill

पटना: राज्य में विकास योजनाओं की रीढ़ माने जाने वाले जीविका कर्मी आज सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। जिन हाथों ने गांव-गांव तक सरकार की योजनाएं पहुंचाईं, वही हाथ अब अपने हक के लिए तख्तियां थामे खड़े हैं। जीविका कर्मियों का यह विरोध प्रदर्शन केवल वेतन का सवाल नहीं, बल्कि सरकार द्वारा किए गए वादों और उनकी अधूरी पूर्ति का प्रतीक बन गया है।

चुनाव से पूर्व सरकार की ओर से स्पष्ट रूप से यह आश्वासन दिया गया था कि सभी जीविका कर्मियों का वेतन दोगुना किया जाएगा। उस समय यह घोषणा कर्मियों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई थी। लेकिन चुनाव बीतने के बाद भी यह वादा कागजों से बाहर नहीं निकल सका। महीनों बीत जाने के बावजूद न तो वेतन दोगुना हुआ और न ही कोई ठोस समय-सीमा तय की गई। ऐसे में कर्मियों के बीच असंतोष का बढ़ना स्वाभाविक है।

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जीविका कर्मियों का कहना है कि वे राज्य के ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार योजनाओं को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। दूर-दराज के इलाकों में कठिन परिस्थितियों में काम करने के बावजूद उन्हें उनके श्रम के अनुरूप वेतन नहीं मिल रहा है। जब सभी कर्मियों के वेतन बढ़ाने की बात हुई थी, तो जीविका कर्मियों को इससे बाहर रखना या देरी करना उनके साथ अन्याय है।

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यह विरोध प्रदर्शन सरकार के लिए एक चेतावनी है कि विकास केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि उन्हें लागू करने वाले कर्मियों के सम्मान और अधिकारों से होता है। यदि समय रहते सरकार ने अपने वादों को पूरा नहीं किया, तो यह असंतोष और गहरा सकता है। अब जरूरत है कि सरकार संवाद के माध्यम से समाधान निकाले और जीविका कर्मियों को उनका वाजिब हक दिलाए, ताकि विकास की यह कड़ी कमजोर न पड़े।


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