100 दिन की चुप्पी से पहले ही एक्टिव हुए तेजस्वी: डर, दबाव या बड़ी रणनीति?
पटना: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव शुक्रवार को वन पोलो रोड स्थित अपने सरकारी आवास पहुंचे, जहां राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की कोर कमेटी की अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में तेजस्वी यादव के साथ राज्यसभा सांसद मीसा भारती, मनोज कुमार झा, संजय यादव सहित RJD के वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। लंबे समय से शांत नजर आ रहे तेजस्वी यादव की यह सक्रियता राजनीतिक गलियारों में कई संकेत दे रही है।
बैठक का मुख्य एजेंडा हालिया चुनावों में पार्टी की करारी हार की समीक्षा रहा। 2025 के चुनाव में RJD महज 28 सीटों पर सिमट गई, जबकि एक समय यह पार्टी बिहार की नंबर-1 राजनीतिक ताकत मानी जाती थी। ऐसे में इस हार ने न सिर्फ पार्टी नेतृत्व को बल्कि समर्थकों को भी गहरी निराशा में डाल दिया है। कोर कमेटी की बैठक में यह चर्चा हुई कि आखिर कहां रणनीतिक चूक हुई और किन कारणों से पार्टी अपने परंपरागत जनाधार को बनाए रखने में विफल रही।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक आत्ममंथन की दिशा में पहला ठोस कदम है। तेजस्वी यादव पहले ही सरकार को 100 दिनों का अल्टीमेटम दे चुके हैं और इस अवधि में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कम बोलने का संकेत दिया था। हालांकि, शुक्रवार को अचानक उनकी सक्रियता यह दर्शाती है कि पार्टी अब अंदरूनी स्तर पर खुद को मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है।
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तेजस्वी यादव की इस पहल से RJD कार्यकर्ताओं और समर्थकों में नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से पार्टी के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच तेजस्वी का मैदान में उतरना यह संकेत देता है कि वह हार को स्वीकार कर उससे सीख लेने के मूड में हैं। यह भी स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में RJD अपनी संगठनात्मक संरचना, चुनावी रणनीति और जनसंपर्क अभियान पर नए सिरे से काम कर सकती है। तेजस्वी यादव की यह सक्रियता न केवल पार्टी के लिए बल्कि बिहार की राजनीति के लिए भी अहम मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि हार की यह समीक्षा RJD को भविष्य में कितनी मजबूती दे पाती है।