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मिडिल ईस्ट जंग का असर भारत तक: कच्चा तेल बेकाबू, बिहार में गैस सिलेंडर के लिए कतारें

The impact of the Middle East war on India

मिडिल ईस्ट में हालिया सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इस क्षेत्र को दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक इलाकों में गिना जाता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव तेल की आपूर्ति पर सीधा असर डालता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हाल की घटनाओं के बाद कच्चे तेल का दाम कई सालों के बाद 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 110 से 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। इससे ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।

मिडिल ईस्ट का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समुद्री मार्ग भी इस समय चर्चा में है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आवाजाही इसी रास्ते से होती है। अगर इस मार्ग पर किसी तरह की बाधा आती है तो वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अगर तेल महंगा बना रहता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, जिससे परिवहन लागत और महंगाई बढ़ने की आशंका है।

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इधर गैस आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 लागू कर दिया है। इसके तहत फिलहाल कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक लगा दी गई है। बिहार में भी पिछले तीन दिनों से नए कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई नहीं पहुंची है। गोपालगंज, दरभंगा, अररिया, बेतिया और सुपौल जैसे जिलों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। कई लोग खाली सिलेंडर लेकर घंटों इंतजार कर रहे हैं, जबकि ऑनलाइन बुकिंग करने के बावजूद समय पर डिलीवरी नहीं मिल पा रही है।

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गैस एजेंसियों के अनुसार, आपूर्ति कम होने और बढ़ती मांग के कारण सिलेंडर के दाम भी बढ़ गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में हालात कैसे रहते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।


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