नई दिल्ली: इन दिनों ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच भीषण जंग जारी है। लगातार मिसाइल दागे जा रहे हैं। अमेरिका इजरायल के लगातार हमलों के बावजूद ईरान पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है जिसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प अपने कई सहयोगी देशों पर युद्ध में कूदने के लिए दबाव बनाते हुए दिख रहे हैं। अभी हाल ही में उन्होंने नाटो देश के सदस्यों को कायर तक कह दिया और कहा कि अमेरिका के बगैर सभी सिर्फ कागजी शेर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर रोक की वजह से बौखलाए हुए है और अन्य देशों को ईरान का दबदबा खत्म करने तथा आवाजाही शुरू करने के लिए सुरक्षा देने का आह्वान कर रहे हैं।

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इस बीच सोशल मीडिया पर एक खबर फैली कि अब अमेरिका भारत की जमीन से ईरान पर हमले करेगा। सोशल मीडिया पर यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गया जिसमें कहा गया है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने के लिए भारत की जमीन का इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी है। इसके लिए अमेरिका ने लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ़ अग्रीमेंट के तहत किसी सैन्य संपत्ति को सहायता देने के लिए पश्चिमी भारत के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहा है। इस पोस्ट में यह भी कहा गया है कि कोंकण तट के पास समुद्र में शायद किसी युद्धपोत की तैनाती भी की गई है जिसे ईरान तथा अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष से जोड़ा जा रहा है।

अब इस मामले में भारत के विदेश मंत्रालय ने पूरा मामला स्पष्ट किया है। सोशल मीडिया पर विदेश मंत्रालय के फैक्ट चेक हैंडल से ईरान पर भारतीय जमीन से हमले करने के दावों को फर्जी करार दिया है। विदेश मंत्रालय की तरफ से भारतीय जमीन से ईरान पर हमले की कोशिश को फर्जी और निराधार बताया गया है। बता दें कि भारत का मौजूदा समय में अमेरिका, इजरायल और ईरान तीनों ही देश के साथ अच्छे संबंध हैं और भारत इस संघर्ष के दौरान कुटनीतिक रणनीति के तहत किसी भी देश के पक्ष में नहीं है बल्कि संघर्ष विराम के पक्ष में है।

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