लैंड फॉर जॉब केस: कोर्ट ने दी ट्रायल की मंजूरी, लालू परिवार की टेंशन बढ़ी
देश में चर्चित लैंड फॉर जॉब घोटाले में लालू परिवार के लिए आज का दिन बेहद अहम रहा। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें कई बड़े नाम शामिल रहे। इस दौरान राजद प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए अदालत में पेश हुए। वहीं, लालू यादव की बेटी मीसा भारती और हेमा यादव अदालत में व्यक्तिगत रूप से हाजिर रहीं।
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सुनवाई के बाद अदालत ने इस मामले में 9 मार्च से ट्रायल शुरू करने की अनुमति दे दी है। ट्रायल के दौरान जांच एजेंसी CBI अपने सबूत अदालत के सामने पेश करेगी। कोर्ट के इस फैसले को मामले की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अदालत से लालू परिवार को आंशिक राहत भी मिली है। लालू प्रसाद यादव ने उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए व्यक्तिगत पेशी से छूट की मांग की थी। इसी तरह तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी ने भी व्यक्तिगत पेशी से राहत मांगी थी। कोर्ट ने तीनों को फिलहाल व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है। इससे पहले अदालत ने इस केस में आरोप तय करते हुए कड़ी टिप्पणी की थी। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा था कि *रेल मंत्रालय का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए किया गया* और सरकारी नौकरियों को सौदेबाजी का जरिया बनाया गया। कोर्ट के मुताबिक, CBI की जांच में एक व्यापक साजिश के संकेत मिले हैं।
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क्या है लैंड फॉर जॉब मामला?
यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रेलवे के पश्चिम मध्य जोन, जबलपुर में ग्रुप-डी पदों पर नियमों को नजरअंदाज कर भर्तियां की गईं। इन भर्तियों के बदले नौकरी पाने वालों या उनके परिजनों ने लालू परिवार या उनके करीबियों के नाम जमीन ट्रांसफर की। CBI का दावा है कि यह जमीन बेनामी थी और पूरी प्रक्रिया कानून के खिलाफ थी। हालांकि, सभी आरोपियों ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए खारिज किया है।