बिहार के सीवान जिले से पीएम पोषण योजना (मिड-डे मील) में अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए निर्धारित अनाज और फंड के कथित दुरुपयोग को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में जिले के करीब 200 प्रधानाध्यापकों और प्रभारी हेडमास्टरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
दरअसल, विभागीय जांच के दौरान यह पाया गया कि कई स्कूलों ने ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज वास्तविक छात्र संख्या की तुलना में प्रपत्र ‘क’ में अधिक बच्चों का नामांकन दिखाया है। इस अंतर ने वित्तीय अनियमितता की आशंका को जन्म दिया है। अधिकारियों का मानना है कि छात्र संख्या बढ़ाकर दिखाने के पीछे सरकारी खाद्यान्न और राशि का अतिरिक्त लाभ लेने की मंशा हो सकती है।
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जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) ने इस मामले को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए संबंधित सभी हेडमास्टरों को नोटिस जारी किया है। निर्देश दिया गया है कि पत्र जारी होने के दो दिनों के भीतर सभी संबंधित शिक्षक यह स्पष्ट करें कि किन परिस्थितियों में पोर्टल से अधिक छात्रों को लाभार्थी सूची में दर्शाया गया।डीपीओ ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो संबंधित प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसमें निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कदम भी शामिल हो सकते हैं।
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इस मामले के बाद विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और कड़ा करने का निर्णय लिया है। सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और प्रखंड साधन सेवियों को निर्देश दिया गया है कि वे एमआईएस और ई-शिक्षाकोष पोर्टल के आंकड़ों का शत-प्रतिशत मिलान सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में योजना का संचालन केवल पोर्टल पर दर्ज वास्तविक डेटा के आधार पर ही किया जाएगा। इस खुलासे के बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
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