पटना चर्चित नीट छात्रा मामले में जांच ने नया मोड़ ले लिया है। 77 दिन बीत जाने के बावजूद ठोस सुराग न मिलने पर सीबीआई ने बड़ा फैसला लेते हुए केस के जांच अधिकारी (IO) को बदल दिया है। अब इस संवेदनशील मामले की जिम्मेदारी दिल्ली सीबीआई की डीएसपी विभा कुमारी को सौंपी गई है, जिससे एक बार फिर जांच में तेजी की उम्मीद जगी है।
दरअसल, 12 फरवरी को सीबीआई ने इस केस को अपने हाथ में लिया था और झारखंड के एएसपी पवन कुमार श्रीवास्तव को जांच अधिकारी बनाया गया था। लेकिन लगातार देरी और कोर्ट की फटकार के बाद उन्हें हटा दिया गया। इससे पहले 9 जनवरी को छात्रा के पिता ने मामला दर्ज कराया था, जिसके बाद यह केस थाना स्तर से एसआईटी और फिर सीबीआई तक पहुंचा। अब तक इस केस में कुल चार जांच अधिकारी बदले जा चुके हैं, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा है।
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पॉक्सो कोर्ट ने भी सीबीआई की धीमी जांच पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब फॉरेंसिक रिपोर्ट में यौन हिंसा के संकेत मिले हैं, तो पॉक्सो एक्ट की धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं। साथ ही केस डायरी और जांच प्रक्रिया में कई विसंगतियों पर भी गंभीर चिंता जताई गई है। मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को तय की गई है। जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। एफएसएल रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर ह्यूमन सीमन मिलने की पुष्टि हुई, लेकिन अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि वह किसका है। एसआईटी द्वारा 25 लोगों का डीएनए टेस्ट कराया गया, लेकिन किसी से भी मैच नहीं हुआ। छात्रा के शरीर पर चोट और खरोंच के निशान भी मिले, जो हिंसा की आशंका को मजबूत करते हैं।
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वहीं, मेडिकल रिपोर्ट को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। एक तरफ डॉक्टर ने ओवरडोज की बात कही, तो दूसरी ओर पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट में यौन हिंसा के संकेत मिले। इस बीच हॉस्टल मालिक को केवल साक्ष्य से छेड़छाड़ के आरोप में जेल भेजा गया है। अब सभी की नजरें डीएसपी विभा कुमारी पर टिकी हैं कि क्या उनके नेतृत्व में इस गुत्थी को सुलझाया जा सकेगा या यह मामला यूं ही सवालों में उलझा रहेगा।