पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है, लेकिन भारत सरकार ने एक संतुलित रणनीति अपनाते हुए आम नागरिकों को राहत देने और देश में ईंधन आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। सरकार का स्पष्ट संदेश है—घबराने की जरूरत नहीं है, देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता पूरी तरह सुरक्षित है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पेट्रोल और डीजल पर विशेष एक्साइज ड्यूटी में कटौती के फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक महीने में करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इस तेजी का असर दुनियाभर में दिख रहा है, जहां कई देशों में ईंधन की कीमतों में 20% से 50% तक की बढ़ोतरी हुई है।
पुरी ने कहा कि भारत सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो वैश्विक रुझान के अनुसार कीमतें बढ़ाई जाएं या फिर खुद वित्तीय दबाव झेलकर नागरिकों को राहत दी जाए। सरकार ने दूसरा विकल्प चुना, ताकि आम जनता पर महंगाई का सीधा असर न पड़े। उन्होंने बताया कि तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग ₹24 प्रति लीटर और डीजल पर ₹30 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है, जिसे कम करने के लिए सरकार ने अपने टैक्स रेवेन्यू में बड़ी कटौती की है।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस फैसले को उपभोक्ताओं के हित में बताया। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में ₹10 प्रति लीटर की कटौती की है। इसके तहत पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि डीजल पर यह ड्यूटी ₹10 से घटाकर शून्य कर दी गई है। इसके साथ ही, डीजल के निर्यात पर ₹21.5 प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर ₹29.5 प्रति लीटर तक टैक्स लगाया गया है, ताकि घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, इन फैसलों का असर तुरंत पेट्रोल पंप की कीमतों पर दिखना तय नहीं माना जा रहा है।
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इस बीच पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने सप्लाई को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। मंत्रालय के अनुसार, देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है और सभी रिटेल फ्यूल आउटलेट्स पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। देशभर में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप बिना किसी बाधा के संचालन में हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक और शरारती खबरों से बचें और घबराहट में अनावश्यक खरीदारी न करें। पीआईबी की प्रेस रिलीज के मुताबिक, भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है, जो 150 से अधिक देशों को रिफाइंड ईंधन की आपूर्ति करता है। इस वजह से भारत में ईंधन की घरेलू उपलब्धता संरचनात्मक रूप से मजबूत बनी रहती है।
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सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश के पास ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। भारतीय तेल कंपनियों ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति का अनुबंध पहले ही कर लिया है। कुल मिलाकर भारत के पास 74 दिनों की आरक्षित क्षमता है, जबकि मौजूदा समय में लगभग 60 दिनों का वास्तविक स्टॉक उपलब्ध है, जिसमें कच्चा तेल, तैयार उत्पाद और रणनीतिक भंडार शामिल हैं।
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एलपीजी को लेकर भी स्थिति पूरी तरह सामान्य बताई गई है। सरकार के अनुसार, एलपीजी की कोई कमी नहीं है और उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाए गए हैं। रिफाइनरी उत्पादन में 40% तक बढ़ोतरी की गई है, जिससे रोजाना लगभग 50 TMT एलपीजी का उत्पादन हो रहा है, जो कुल जरूरत का 60% से अधिक है। तेल कंपनियां प्रतिदिन 50 लाख से ज्यादा सिलेंडर की डिलीवरी कर रही हैं। हाल ही में घबराहट के चलते मांग 89 लाख सिलेंडर तक पहुंच गई थी, लेकिन अब यह फिर से सामान्य स्तर पर आ गई है। कुल मिलाकर, सरकार ने एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच टैक्स में कटौती कर आम लोगों को राहत देने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर देश में ईंधन की आपूर्ति को लेकर स्पष्ट आश्वासन देकर किसी भी तरह की अफवाहों पर विराम लगाने की कोशिश की है।