रांची: प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के शीर्ष नेता और पोलित ब्यूरो के सदस्य प्रशांत बोस उर्फ़ किशन दा का शुक्रवार को रांची के रिम्स में निधन हो गया। 75 वर्षीय प्रशांत बोस की अचानक तबियत बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें जेल से रिम्स अस्पताल लाया गया जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। किशन दा की मौत से नक्सली गलियारे और सुरक्षा एजेंसियों में हलचल शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि उनकी तबियत गंभीर हो गई थी।
एक जानकारी के अनुसार शुक्रवार की अहले सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें रिम्स पहुँचाया गया जहां डॉक्टरों की विशेष टीम ने इलाज शुरू किया लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। करीब 10 बजे डॉक्टरों ने उनके मौत की पुष्टि कर दी। जेल और अस्पताल प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कर दी है। बताया जा रहा है कि प्रशांत बोस को माओवादी संगठन में महासचिव नंबला केशव राव के बाद दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था। वे सन्गठन की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के सदस्य रहे और ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो के सचिव भी थे।
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संगठन के अंदर वह किशन दा, मनीष और बूढा के नाम से जाने जाते थे। उनका नाम रणनीतिक फैसलों और संगठन की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका के लिए जाना जाता था। प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा टोल ब्रिज के पास पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था। उस समय उनके खिलाफ एक करोड़ रूपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में 200 से अधिक नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड भी थे। उनके नेतृत्व में कई बड़े हमले और संगठनात्मक निर्णय लिए गए जो नक्सली गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते थे।
लगभग चार दशकों तक सक्रिय रहे प्रशांत बोस को संगठन का थिंक टैंक माना जाता था। गिरफ्तारी के बाद वह जेल में बंद रहे और उम्र से जुडी बिमारियों से जूझ रहे थे। लंबे समय से जेल में बंद प्रशांत बोस की शुक्रवार की अहले सुबह अचानक उनकी तबियत बिगड़ी और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
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