कैमूर: अक्सर लोग बच्चे से ख़ुशी पाने की चाहत रखते हैं लेकिन बिहार में एक नगर परिषद के सभापति को उनके बच्चे के कारण ही अयोग्य घोषित कर दिया गया। राज्य निर्वाचन आयोग की इस कार्रवाई के बाद अब नगर परिषद सभापति का पद खाली हो गया है। इसके साथ ही अब जिलाधिकारी को निवर्तमान सभापति के विरुद्ध गलत हलफनामा एवं तथ्य छिपाने के लिए विधिक कार्रवाई चार सप्ताह के अंदर करने का आदेश जारी किया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने भभुआ नगर परिषद के सभापति विकास कुमार तिवारी के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए पद से विमुक्त कर दिया साथ ही अब उनके विरुद्ध क़ानूनी कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी गई अहि।

जानकारी के अनुसार भभुआ नगर परिषद के पूर्व सभापति जैनेन्द्र कुमार आर्य ने राज्य निर्वाचन आयोग में एक शिकायत दर्ज कराई थी कि सभापति के चार बच्चे हैं जिसमें कम से कम एक सन्तान की जन्म तिथि 4 अप्रैल 2008 के बाद की है। शिकायत के आधार पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने जांच शुरू की और उनके रिपोर्ट में सामने आया कि सभापति विकास कुमार तिवारी की तीन संतानों की जन्मतिथि 4 अप्रैल 2008 के बाद की है।जांच रिपोर्ट के आधार पर अब राज्य निर्वाचन आयोग ने सभापति विकास कुमार तिवार को अयोग्य घोषित कर दिया है जिसके बाद अब भभुआ नगर परिषद में सभापति का पद खाली हो गया।

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जिला निर्वाचन पदाधिकारी के जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि चुनावी हलफनामो में उन्होंने दो पुत्र और दो पुत्रियों की जानकारी दी है जबकि स्कूल से उपलब्ध कराये गए जन्मतिथि से संबंधित साक्ष्य में तीन बच्चों की जन्मतिथि 04 अप्रैल 2008 के बाद की है। सुनवाई के दौरान विकास कुमार तिवारी की ओर से उपलब्ध कराए गए साक्ष्य और तथ्यों को आयोग ने अयोग्य घोषित कर दिया साथ ही तथ्य छिपा कर गलत शपथ पत्र के आधार पर मुख्य पार्षद चुनाव लड़ने और निवाचित होने को भी गलत कहा। अब उनके निर्वाचन को गलत करार देते हुए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिलाधिकारी को आदेश दिया है कि वे प्राप्त शक्तियों का प्रयोग कर नियमानुसार विधिक कार्रवाई करें और उससे आयोग को चार सप्ताह के अंदर अवगत करायें।

बता दें कि बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 नगर निकाय चुनावों में वैसे कोई भी अभ्यर्थी भाग नहीं ले सकते हैं जिनके 4 अप्रैल 2008 के बाद दो से अधिक संतान जन्म लिए हों। वहीं अगर अभ्यर्थी के दो से अधिक संतान इस तिथि से पहले की जन्मतिथि के हैं तो फिर वे चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन इस तिथि के बाद अगर किसी अभ्यर्थी की तीसरी या उसके बाद कोई संतान ने जन्म ली है तो फिर वह अयोग्य ठहराए जायेंगे और चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

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