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बुलडोजर गिरे गरीबों पर, माफिया घूमे बेखौफ, सदन में गूंजा शराब का मुद्दा, सरकार पर उठे नए सवाल, क्या सिस्टम हो गया फेल?

The issue of liquor resonated in the House

बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान एक बार फिर शराबबंदी का मुद्दा केंद्र में आ गया है। जहां एक ओर सरकार विभिन्न विभागों के बजट पर चर्चा कर रही है, वहीं दूसरी ओर शराबबंदी कानून को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तकरार देखने को मिल रही है। सदन के अंदर उठे सवाल अब बाहर भी राजनीतिक बहस का कारण बन चुके हैं। मंगलवार को ग्रामीण विकास विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के ही रालोमो विधायक माधव आनंद ने शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए और जरूरत पड़े तो संशोधन भी किया जाना चाहिए। बुधवार को भी उन्होंने मीडिया से बातचीत में अपनी मांग दोहराई। इस बयान के बाद विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल गया।

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राजद, कांग्रेस और एआईएमआईएम के विधायकों ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि शराबबंदी पूरी तरह फेल हो चुकी है। राजद विधायक सूबेदार दास ने आरोप लगाया कि राज्य में “होम डिलीवरी” के जरिए शराब बेची जा रही है। वहीं, कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने कहा कि अगर विधायकों और अधिकारियों की जांच हो जाए तो शराबबंदी की असल तस्वीर सामने आ जाएगी। हालांकि संसदीय कार्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने साफ किया कि सरकार के स्तर पर शराबबंदी कानून की समीक्षा का कोई प्रस्ताव नहीं है। वहीं एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार ने कहा कि कानून को और प्रभावी बनाने के लिए समीक्षा की जा सकती है।

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इसी बीच जहानाबाद पहुंचे राजद के पूर्व मंत्री शिव चन्द्र राम ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार में 24 घंटे शराब उपलब्ध है और खुलेआम होम डिलीवरी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े शराब माफियाओं पर कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि गरीबों पर सख्ती दिखाई जा रही है। बजट सत्र के बीच शराबबंदी पर जारी यह सियासी शास्त्रार्थ आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। सरकार जहां कानून को प्रभावी बता रही है, वहीं विपक्ष इसे पूरी तरह असफल करार दे रहा है।


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