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NEET छात्रा मामले में बड़ा ट्विस्ट: DNA सबूत के बाद अब POCSO एक्ट की एंट्री, खुलने वाला है सच !!

NEET छात्रा से रेप और संदिग्ध मौत के मामले में जांच ने रफ्तार पकड़ ली है। DNA साक्ष्य मिलने के बाद 6 संदिग्धों के सैंपल लिए गए हैं, वहीं अब पटना पुलिस इस केस में POCSO एक्ट जोड़ने की तैयारी कर रही है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट ...

POCSO ACT IN NEET STUDENT CASE
NEET छात्रा मामले में बड़ा ट्विस्ट: DNA सबूत के बाद अब POCSO एक्ट की एंट्री, खुलने वाला है सच !!- फोटो : Darsh News

पटना: NEET की तैयारी कर रही छात्रा से रेप और संदिग्ध मौत के मामले में जांच अब बेहद अहम और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। छात्रा के अंडरगारमेंट से स्पर्म मिलने के बाद पुलिस और SIT ने यह मान लिया है कि छात्रा के साथ दुष्कर्म हुआ है। इसके बाद फॉरेंसिक और कानूनी दोनों स्तर पर जांच तेज कर दी गई है। शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े 6 संदिग्ध लड़कों के DNA सैंपल पटना के गर्दनीबाग अस्पताल में जज और मेडिकल टीम की मौजूदगी में लिए गए हैं। करीब दो घंटे चली इस प्रक्रिया के बाद सभी सैंपल सील कर FSL भेजे जा रहे हैं। इनका मिलान छात्रा के कपड़ों से मिले स्पर्म के DNA से किया जाएगा। SIT के अनुसार, ये सभी युवक हॉस्टल आते–जाते रहे हैं और घटना के दिन कुछ की लोकेशन भी हॉस्टल के आसपास मिली है। CCTV फुटेज, कॉल डिटेल और गवाहों के बयान के आधार पर इन्हें संदिग्ध माना गया है।

इसी बीच पुलिस सूत्रों से एक और बड़ी जानकारी सामने आई है। लगातार सवालों और किरकिरी के बाद अब पटना पुलिस इस केस में POCSO एक्ट जोड़ने की तैयारी में जुट गई है। घटना के करीब 20 दिन बाद यह कदम उठाया जा रहा है। परिजनों ने SIT को बताया है कि मृतक छात्रा की उम्र 18 साल से कम थी। POCSO एक्ट जोड़ने से पहले SIT ने परिवार से उम्र से जुड़े दस्तावेज मांगे थे। परिजनों ने छात्रा का आधार कार्ड और मैट्रिक सर्टिफिकेट पुलिस को सौंपा है। इन दोनों प्रमाणपत्रों में छात्रा की उम्र 18 वर्ष से कम दर्ज है। इन दस्तावेजों के आधार पर पुलिस छात्रा को नाबालिग मानते हुए कोर्ट में POCSO एक्ट की धाराएं जोड़ने के लिए अनुरोध पत्र दाखिल करेगी। कोर्ट से अनुमति मिलते ही इस केस में POCSO एक्ट जोड़ दिया जाएगा।



अब हम आपको बताते हैं, POCSO एक्ट क्या है?

POCSO यानी Protection of Children from Sexual Offences Act। यह कानून 18 साल से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत रेप, यौन शोषण और छेड़छाड़ जैसे मामलों में सख्त सजा का प्रावधान है। POCSO केस की सुनवाई विशेष अदालत में होती है और इसमें तेजी से फैसला सुनाने की व्यवस्था होती है। POCSO एक्ट जुड़ते ही यह मामला POCSO की विशेष अदालत में स्थानांतरित हो जाएगा। इससे जांच और ट्रायल की प्रक्रिया और मजबूत व तेज मानी जा रही है। पुलिस का कहना है कि DNA रिपोर्ट और POCSO एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई के बाद दोषियों को बचने का कोई रास्ता नहीं मिलेगा।

अब इस सनसनीखेज मामले में सबकी नजर FSL रिपोर्ट और कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है, जिससे पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।


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