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मिनटों की चूक और सालभर की मेहनत बेकार ! इंटर परीक्षा केंद्रों पर सख्ती से मचा बवाल

बिहार में इंटरमीडिएट परीक्षा के पहले दिन सख्ती ने कई छात्रों की परीक्षा छीन ली। रोहतास के डेहरी और सहरसा में एक से पांच मिनट की देरी पर परीक्षार्थियों को केंद्र में प्रवेश नहीं मिला, जिससे छात्राएं रोती-बिलखती नजर आईं।

Strictness at Inter exam centres in bihar
मिनटों की चूक और सालभर की मेहनत बेकार! इंटर परीक्षा केंद्रों पर सख्ती से मचा बवाल- फोटो : Darsh NEWS

बिहार में आज से इंटरमीडिएट की परीक्षा शुरू हो गई, लेकिन पहले ही दिन सख्त गाइडलाइन के कारण कई परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया। रोहतास जिले के डेहरी क्षेत्र से लेकर सहरसा जिले तक एक जैसी तस्वीर देखने को मिली, जहां महज एक से पांच मिनट की देरी के कारण परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया।

रोहतास जिले के डेहरी में रामारानी जैन बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में बनाए गए परीक्षा केंद्र पर सुबह करीब 11 परीक्षार्थी बाहर ही रह गए। परीक्षार्थियों का कहना है कि वे केवल एक मिनट देर से पहुंचे थे, लेकिन गेट बंद कर दिया गया। इनमें सोनम नाम की एक गर्भवती परीक्षार्थी भी शामिल है। छात्राओं का आरोप है कि कुछ परीक्षार्थियां पिछले गेट से किसी तरह अंदर चली गईं, लेकिन बाद में उन्हें धक्का देकर बाहर निकाल दिया गया। एक गर्भवती छात्रा ने भी धक्का मारकर बाहर करने का आरोप लगाया है। एक परीक्षार्थी ने बताया कि ट्रैफिक जाम की वजह से उसे मात्र एक मिनट की देरी हो गई थी। प्रवेश न मिलने के बाद कई छात्राएं गेट के पास खड़ी होकर रोती रहीं और काफी मायूस नजर आईं।

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वहीं सहरसा जिले में भी हालात कुछ अलग नहीं रहे। यहां मनोहर उच्च विद्यालय और रमेश झा महाविद्यालय में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर कई परीक्षार्थी समय से नहीं पहुंच सके। बताया गया कि मात्र पांच मिनट की देरी के कारण परीक्षार्थियों को अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली और उनकी परीक्षा छूट गई। रमेश झा महिला महाविद्यालय परीक्षा केंद्र पर कुछ परीक्षार्थी गेट के ऊपर से छलांग लगाकर अंदर घुसते भी नजर आए। परीक्षा समिति के अनुसार गाइडलाइन बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रथम पाली में सुबह 9 बजे से पहले हर हाल में परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करना होगा। तय समय के बाद प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। हालांकि, सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक या दो मिनट की देरी पर इतनी सख्ती उचित है, खासकर तब जब मामला छात्रों के पूरे साल की मेहनत और भविष्य से जुड़ा हो।


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