पटना: बिहार में विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है और विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को ब्राह्मणवाद को लेकर जम कर हंगामा हुआ। इस दौरान पक्ष और विपक्ष में जम कर तकरार हुआ। सदन में माले विधायक संदीप सौरव ने बिहार में UGC कानून लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति देख कर भेदभाव किया जाता है। जब UGC ने इस कानून को लागू किया तो ब्राहमणवादी लोगों ने इसका विरोध किया जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे वापस करवा दिया। देश में कब तक रोहित बेमुला सहित अन्य छात्रों की मौत होती रहेगी।
सदन में माले विधायक के ब्राह्मणवाद पर सवाल के बाद उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने जोरदार पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि आप संविधान और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करते हैं तो फिर इस तरह की भाषा उचित नहीं है। किसी की भी मृत्यु राज्य और देश के लिए क्षति होती है, मैं हर समाज का सम्मान करता हूँ। आजकल समाज के प्रति जो जहर बोया जा रहा है वह देश को कमजोर कर रहा है।
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उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि मैं भी मुजफ्फरपुर में टेक्निकल कॉलेज में पढने गया था, उस वक्त किसकी सरकार थी? मैं भूमिहार ब्राह्मण समाज से हूँ फिर भी मेरा रैगिंग हुआ था। मुझे हॉस्टल छोड़ने के लिए विवश किया गया था। यह बाबा साहेब के विभिन्न जातियों के लिए सपनों को तार तार करने की कोशिश है। यह लोग समाज के साथ गद्दारी कर रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा के जवाब पर राजद विधायक आलोक मेहता उठ खड़े हुए और कहा कि जिस तरह से ये लोग बोल रहे हैं उससे लग रहा है कि चोर की दाढ़ी में तिनका है। यहां जातिवाद नहीं बल्कि ब्राह्मणवाद की बात की जा रही है। इसके बाद विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि विपक्ष में बैठे लोगों को ब्राह्मणों से तकलीफ है, इन्हें ब्राह्मणवाद समझ में नहीं आती है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी अपने ब्राह्मण मित्र सुदामा के पैर पखाड़े थे। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने एक्शन लेते हुए ब्राह्मणवाद शब्द को प्रोसेडिंग से हटाने का आदेश दिया।
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