नालंदा: बिहार में इन दिनों भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार कार्रवाई जारी है। इसी कड़ी में शनिवार की शाम निगरानी विभाग की टीम ने छापेमारी कर एक पुलिस सब इंस्पेक्टर को 90 हजार रुपए घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। दारोगा की गिरफ्तारी के बाद जिले में पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। निगरानी की टीम ने राजगीर थाना में पदस्थापित सब इंस्पेक्टर देवकांत कुमार को 90 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया जिन्हें अपने साथ लेकर पटना चली गई। बताया जा रहा है कि सब इंस्पेक्टर ने एक डॉक्टर का लाइसेंसी हथियार थाना से छोड़ने के एवज में 1 लाख रूपये घूस की मांग की थी, बाद में फिर 90 हजार रुपए पर डील हुई और वह रकम लेते हुए सब इंस्पेक्टर रंगे हाथ दबोच लिए गए।
मामले को लेकर शिकायतकर्ता रविशंकर सिंह ने बताया कि बीते 31 मार्च को गांव के कुछ बच्चों के बीच खेलने के दौरान मारपीट हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने दो बच्चों को हिरासत में लिया था और उसे मेडिकल चेकअप करवाने के लिए अनुमंडलीय अस्पताल लेकर गई थी। उन दोनों बच्चों में से एक हमारे स्टाफ का भी बेटा था। मेडिकल चेकअप के दौरान ही किसी काम से हम भी वहां पहुंचे थे तभी दूसरे पक्ष के लोग वहां पहुंचे और मेरे ऊपर हमला करने की कोशिश की। लोगो को उग्र देख मैने अपना लाइसेंसी हथियार लहराया था जिसके बाद सभी लोग मौके से भाग निकले। इस मामले में उन लोगों ने मेरे विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई और पुलिस ने मुझे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
डॉक्टर ने बताया कि करीब एक सप्ताह बाद जब मैं जेल से बाहर आया तो केस के अनुसंधान अधिकारी ने हथियार छोड़ने और उसका लाइसेंस रद्द नहीं करने के एवज में मुझसे 1 लाख रुपए की मांग की और अंत में 90 हजार रुपए में डील फाइनल हुआ था। इसके बाद हमने निगरानी विभाग को मामले की सूचना दी और अब वह दारोगा गिरफ्त में हैं। वहीं मामले में निगरानी डीएसपी श्रीराम चौधरी ने बताया कि डॉक्टर रविशंकर ने दारोगा के द्वारा रिश्वत मांगे जाने की शिकायत दर्ज कराई थी जिसके ऊपर कार्रवाई करते हुए दारोगा को गिरफ्तार किया गया है। अब पटना में उनसे पूछताछ के बाद विशेष निगरानी कोर्ट में पेश किया जाएगा।




