पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की छात्रा के साथ हुए रेप और मौत मामले में पुलिस की लापरवाही पर गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने कड़ा कदम उठाया है। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चित्रगुप्त नगर थाना की प्रभारी रौशनी कुमारी और कदमकुआं के दरोगा हेमंत झा को निलंबित कर दिया। घरेलू सुरक्षा के प्रति गंभीरता दिखाते हुए सम्राट चौधरी ने प्रदेश के डीजीपी विनय कुमार, एडीजी, एसएसपी और पूरी SIT को अपने आवास पर तलब किया। SIT आठ दिन तक जांच करने के बावजूद कोई निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई थी। बताया जा रहा है कि गृह मंत्री जांच की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं।
CID की टीम भी अब मामले में शामिल हो गई है। रविवार को CID की टीम शंभू हॉस्टल पहुंची और दो घंटे तक जांच की। जांच पूरी होने के बाद टीम बिना किसी मीडिया बयान के लौट गई। इसी दौरान हॉस्टल की छात्राओं ने अपने सामान को निकालने के लिए पुलिस और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हॉस्टल का दौरा किया। करीब 100 छात्राओं का सामान हॉस्टल से बाहर लाया गया।
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जांच - पड़ताल में यह भी सामने आया कि शुरुआती तीन दिनों में पुलिस की गैरहाजिरी ने जांच को प्रभावित किया। 6 जनवरी को छात्रा बेहोश मिली थी, लेकिन पुलिस ने तुरंत कार्रवाई नहीं की। ना तो हॉस्टल सील किया गया, ना कमरे और बिस्तर की फोरेंसिक जांच हुई। थाना प्रभारी रौशनी कुमारी ने प्रारंभ में इसे सुसाइड बताकर गलत रिपोर्ट बनाई, जो आगे के अधिकारियों तक पहुंची।
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फॉरेंसिक टीम की रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर स्पर्म पाए जाने की पुष्टि हुई है, जिससे रेप की पुष्टि होती है। इसके बावजूद ASP, SP और SSP स्तर पर मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। कई अधिकारियों ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने से पहले निष्कर्ष दे दिया। प्रारंभिक डॉक्टर की रिपोर्ट में रेप की संभावना से इनकार किया गया, जबकि पोस्टमॉर्टम में शरीर पर चोट और संघर्ष के निशान मिले। यह मामला पुलिस और प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। अब गृह मंत्री सम्राट चौधरी की कड़ी निगरानी में SIT और CID टीमों की संयुक्त जांच जारी है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी निष्पक्षता और गंभीरता से होनी चाहिए। इस मामले ने बिहार में संवेदनशील मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है।