पटना में एक तरफ जहां बापू सभागार में पान महासम्मेलन का भव्य आगाज हुआ, वहीँ दूसरी ओर राज्य की राजनीति में तेज होती हलचल ने माहौल को और भी गरमा दिया है। सांस्कृतिक आयोजन और सियासी घटनाक्रम एक साथ चलते नजर आये। पान महासम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में तेजस्वी यादव पहुंचे। उनके साथ मंच पर मदन मोहन झा समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। इस आयोजन में अति विशिष्ट अतिथि के तौर पर दीपांकर भट्टाचार्य को भी आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक पान को लेकर चर्चा के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी देखने को मिले।
इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (IIP) के अध्यक्ष और सहरसा विधायक आईपी गुप्ता ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को भी निमंत्रण दिया था, लेकिन दिल्ली में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कारण वे शामिल नहीं हो सके। इधर, बिहार की सत्ता को लेकर सियासी गतिविधियां चरम पर हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 12 घंटे के भीतर दूसरी बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने सीएम हाउस पहुंचे। इस दौरान विजय चौधरी भी उनके साथ मौजूद रहे। करीब 20 मिनट चली इस अहम बैठक के बाद संकेत मिले कि सरकार गठन को लेकर मंथन अंतिम चरण में है।
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बैठक के बाद विजय चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री के चेहरे का फैसला भारतीय जनता पार्टी करेगी, जिसके बाद एनडीए की बैठक में सहमति बनेगी। वहीं, जदयू के नेता संजय झा ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राजनीतिक सरगर्मी को और तेज कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, 14 अप्रैल को नीतीश कुमार अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जबकि 15 अप्रैल को नई सरकार के गठन की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन तारीखों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच बीजेपी और जदयू के विधायकों को पटना में ही रहने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे साफ है कि अगले 48 घंटे बेहद निर्णायक हो सकते हैं।
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दूसरी ओर, राजधानी में एक नया सियासी ट्रेंड भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री आवास और जदयू कार्यालय के बाहर लगे पोस्टरों में निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठाई गई है। पोस्टर में उन्हें नीतीश कुमार की “परछाई” बताते हुए बिहार के लिए बेहतर विकल्प बताया गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर तेजस्वी यादव ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नए मुख्यमंत्री के नाम से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि जनता का जनादेश एनडीए के पास नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पिछले दो महीनों से निष्क्रिय है और कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
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तेजस्वी ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार खुद मुख्यमंत्री बने रहना चाहते थे, लेकिन अब हालात उनके नियंत्रण से बाहर हैं। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी ही उन्हें पद से हटाने की कोशिश कर रही है। बिहार में राजनीतिक अनिश्चितता के बीच आने वाले दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं, जहां सत्ता परिवर्तन की पटकथा कभी भी पूरी हो सकती है।




