पटना में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत ने सिर्फ अपराध की चर्चा नहीं बढ़ाई, बल्कि यह जांच प्रक्रिया और अधिकारियों की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। घटना को दो महीने से अधिक समय हो गया, फिर भी मौत के कारण का स्पष्ट विवरण नहीं मिलना न्याय प्रक्रिया की गंभीरता पर छाया डालता है।पॉक्सो विशेष अदालत में बुधवार को शंभु गर्ल्स हॉस्टल के मकान मालिक मनीष रंजन की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। बेऊर जेल में बंद मनीष रंजन को पहली बार अदालत में पेश किया गया। अदालत ने CBI से पूछा कि यदि SIT ने पूरी जांच और संबंधित कागजात सौंप दिए हैं, तो पिछले 20 दिनों से कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

यह भी पढ़ें: पटना में बदला मौसम, सुबह हुई हल्की बारिश, 15–16 मार्च को फिर बदल सकता है मौसम

मनीष रंजन का बयान:
मनीष रंजन ने अदालत को स्पष्ट किया कि घटना के दिन वह घर पर थे। उन्होंने कहा कि 5 जनवरी को सुबह अपनी बेटी को लेकर पावापुरी मेडिकल कॉलेज गए और रात 8 बजे लौट आए। 6 जनवरी को सुबह 10 बजे ऑफिस गए और रात 8 बजे वापस लौटे। 7 जनवरी को सुबह 10 बजे हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल ने उन्हें घटना की जानकारी दी।

जांच अधिकारियों के बयान में मतभेद: