पटना: राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने एवं महिलाओं को एनीमिया मुक्त करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने गुरुवार को ऊर्जा ऑडिटोरियम में एफसीएम थेरेपी इनिशिएटिव (फेरिक कार्बॉक्सीमाल्टोज फॉर एनीमिया मैनेजमेंट) कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य राज्य की महिलाओं में एनीमिया की समस्या को जड़ से समाप्त करना है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दवाओं की आपूर्ति के मामले में बिहार आज देश में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य के पास लगभग दो लाख एफसीएम डोज उपलब्ध हैं। शुभारंभ के अवसर पर प्रत्येक जिले की 20 गर्भवती महिलाओं को यह डोज दी जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी जिलों में कम से कम 300 इंजेक्शन तत्काल भेजे जाएं।

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मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि अगले एक महीने के भीतर यह सुविधा सभी जिलों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएससी) तक पहुंच जाए, ताकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों की महिलाओं को इलाज के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। अब वे अपने ही प्रखंड स्तर पर यह सुविधा प्राप्त कर सकेंगी। उन्होंने एनीमिया मुक्त बिहार अभियान में आशा कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सेविकाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। साथ ही जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय सहयोग दें और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर इसे गांव-गांव तक पहुंचाएं।

 मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है, लेकिन अभी इसमें और सुधार की आवश्यकता है। सरकार का लक्ष्य इन दरों को एक अंक में लाना है। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री लोकेश कुमार ने कहा कि आने वाले समय में बिहार का स्वास्थ्य विभाग देश के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित होगा। कार्यक्रम में विभाग के अधिकारी (ईडी) अमित पांडेय, डॉ अनुपमा सहित सभी जिलों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े स्वास्थ्यकर्मी और पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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