पटना: बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव में NDA और महागठबंधन दोनों ही के पास सभी सीटों के लिए उपयुक्त वोट उपलब्ध नहीं थे। चार सीटों पर NDA की जीत तय थी जबकि पांचवीं सीट के लिए 3 वोटों की कमी थी वहीँ महागठबंधन के पास इस सीट के लिए 6 वोटों की कमी थी। इस सीट पर जीत के लिए विधायकों की जोड़ तोड़ की आशंका बनी हुई थी। हालांकि महागठबंधन के नेतृत्व और प्रत्याशी आश्वस्त थे कि ओवैसी की पार्टी AIMIM और मायावती की पार्टी बसपा के विधायकों का समर्थन उन्हें मिल जायेगा जिससे वह वोट जीत सकते हैं। महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने 6 वोटों के लिए समर्थन ले भी लिया लेकिन बावजूद इसके उन्हें हार का सामना करना पड़ा और इसका मुख्य कारण था राजद और कांग्रेस के चार विधायकों का मतदान से दूरी बना लेना।
इस मामले में विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि भाजपा ने विपक्ष के विधायकों को रूपये के बल पर खरीद लिया और उन्हें मतदान से रोक दिया। इसके साथ ही उन्हें विभिन्न मामलों को लेकर डराया धमकाया भी गया जिसकी वजह से कांग्रेस और राजद के चार विधायकों ने मतदान नहीं किया और इसका परिणाम हुआ कि महागठबंधन के उम्मीदवार एडी सिंह को हार का सामना करना पड़ा। अब इस मामले में कांग्रेस के विधायक अभिषेक रंजन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मेरे पास भी कॉल आया था लेकिन यह एक विचारधारा की लड़ाई थी और मैं अपनी पार्टी के सिद्धांत से अलग नहीं जा सकता था। मैं अपनी पार्टी की विचारधारा और संविधान बचाने की लड़ाई के साथ खड़ा हूँ।
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कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को सम्मान नहीं मिलने की वजह से अन्य विधायकों के द्वारा वोटिंग से दुरी बनाने के सवाल पर कहा कि ऐसा कुछ बात नहीं है। गठबंधन में सभी नेता को सम्मान मिलता है और हमने अपने नेता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और बिहार प्रभारी के निर्देश के अनुसार ही काम किया है। राज्यसभा चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही हमें यह निर्देश मिल गया था कि हमारी पार्टी राजद के प्रत्याशी को समर्थन देगी और हमने वही किया जो हमारी पार्टी के नेतृत्व ने कहा। अब प्रदेश अध्यक्ष ने उन्हें क्या कहा क्या नहीं कहा यह मैं नहीं बता सकता हूँ। मुझे बस इतना पता था कि मैं अपनी पार्टी के सिद्धांत से अलग नहीं जा सकता हूँ।
कांग्रेस विधायक ने भविष्य में किसी अन्य पार्टी में जाने के सवाल पर कहा कि मैंने युवा कांग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष के रूप में अपनी राजनीति शुरू की थी और पार्टी ने मुझे दो बार चुनाव लड़ने का मौका दिया। पार्टी के भरोसे की वजह से ही आज मैं विधायक बना हूँ ऐसे में सवाल ही नहीं उठता है कि मैं अपनी पार्टी की विचारधारा या सिद्धांत से दुरी बनाऊंगा। वहीं एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए अभिषेक रंजन ने राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग के सवाल पर कहा कि संभव है कि उनलोगों ने हॉर्स ट्रेडिंग की हो। मेरे पास भी फोन आया था लेकिन मैंने मना कर दिया था।
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