पटना: राज्यसभा की पांच सीटों पर बिहार में 6 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया था और उसमें सभी सीटों पर NDA ने जीत दर्ज की जबकि महागठबंधन के प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। महागठबंधन के प्रत्याशी की हार के पीछे उनके अपने ही विधायक का हाथ बताया जा रहा है क्योंकि कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक ने मतदान ही नहीं किया। अगर ये चारों विधायक मतदान करते तो फिर महागठबंधन के उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित थी।
हालांकि मतदान नहीं करने के आरोप में कांग्रेस ने अपने तीनों विधायकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण की मांग की है जबकि अब तक राजद ने कोई कार्रवाई नहीं की है। अब इस मामले में भी बिहार में सियासत शुरू हो गई है। एक तरफ राजद कह रही है कि विधायक बख्शे नहीं जायेंगे वहीं भाजपा ने तेजस्वी यादव को चुनौती दी है कि अगर आप के अंदर हिम्मत है तो फैसल रहमान को पार्टी से निकाल दें या फिर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिख कर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग करें।
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इस मामले में बात करते हुए राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि जिन चार महापुरुष की वजह से हमारे उम्मीदवार हारे हैं वे लोग झोला के बोझ तले दब गए और मतदान नहीं किया। वह कहते हैं कि मां की तबियत खराब थी तो बसपा विधायक के पिता जी की भी तबियत खराब थी। वह वोट डाल कर फिर अपने पिता के पास भी फर्ज पूरा करने गए थे तो जो लोग बहानेबाजी कर रहे हैं उनकी नहीं सुनी जाएगी, क्योंकि सच्चाई कभी छुप नहीं सकता है। जब अनुशासन भंग होता है तो पार्टी विचार जरुर करती है और उनके मामले में भी विचार करेगी और उन्हें जवाब तो देना ही पड़ेगा। हम अपने गठबंधन के सदस्यों को लेकर आगे बढ़े लेकिन धनबल का उपयोग करने वाले लोग जीत गए। नैतिक तौर पर हम हार कर भी जीत गए जबकि वे लोग जीत कर भी हार गए हैं।
राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा के द्वारा सही उम्मीदवार नहीं होने की बात कहे जाने पर कहा कि वे खुद किस दल से आये थे। वह बहुत अच्छे आदमी हैं जो टिकट ले लिया। कांग्रेस ने गड़बड़ आदमी को टिकट दिया तो उसने गड़बड़ ही किया है।
वहीं दूसरी तरफ भाजपा ने राजद पर तंज कसते हुए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को चुनौती दी है। भाजपा के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि महागठबंधन ने दूसरे दलों से समर्थन ले लिया लेकिन तेजस्वी के अपने विधायक और सहयोगी दल के विधायकों ने ही धोखा दे दिया और वे लोग चुनाव हार गए। कांग्रेस ने तो अपने विधायकों को नोटिस जारी कर दिया है और अब तेजस्वी यादव की बारी है। अगर तेजस्वी यादव में हिम्मत है तो वे अपने विधायक के विरुद्ध कार्रवाई करें। अगर वह अपने विधायक पर कार्रवाई करते हैं तो फिर उनकी खुद की कुर्सी चली जाएगी।
ऐसे विवश नेता को अब जनता बर्दाश्त नहीं कर सकती है। लालू यादव का बेटा होने के कारण वे इतनी दूर तक चले गए, अब आगे नहीं चल सकते हैं। उनकी राजनीति खत्म हो गई है। तेजस्वी महागठबंधन का नेतृत्व करने चले हैं और खुद की पार्टी उनसे कंट्रोल हो नहीं रही है ऐसे में उन्हें अब छोड़ देना चाहिए और सबसे पहले अपनी पार्टी को देखना चाहिए।




