नई दिल्ली: एक तरफ बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में काफी काम किया और अब वह दिल्ली की राजनीति करने जा रहे हैं तो इसी बीच अब मोदी सरकार भी देश भर की महिलाओं को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में जुटी है। केंद्र की सरकार नया परिसीमन तैयार होने से पहले ही देश के सदनों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विचार कर रही है और इस दिशा में गृह मंत्री ने पक्ष और विपक्ष के साथ बातचीत भी शुरू कर दी है। बातचीत अगर सकारात्मक दिशा में जाती है तो फिर संभव है सरकार मौजूदा सत्र में ही महिला आरक्षण कानून में संशोधन पेश किया जा सकता है।
केंद्र सरकार की तैयारी है कि आगामी लोकसभा चुनाव से केंद्रीय सदन में और राज्यों के सदन में सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढाई जाये साथ ही सदनों में महिलाओं की भागीदारी 33 प्रतिशत तक सुनिश्चित की जाए। सरकार का प्रस्ताव है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संशोधन के जरिये 2011 में जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा में सदस्यों की संख्या को 50 प्रतिशत बढ़ा कर उसमें एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जाये।
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इसके साथ ही मौजूदा कानून व्यवस्था के अनुसार जनगणना का कार्य समाप्त होने के बाद सरकार परिसीमन आयोग भी गठित करेगी जिसके बाद लोकसभा और राज्यसभा में सीटों की संख्या बढाई जा सकेगी। लेकिन अगर 2011 के जनगणना को आधार बनाया जाये तो नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 यानि महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू किया जा सकता है। इस कानून के लागू हो जाने के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव और 2030 के बिहार विधानसभा चुनाव में बिहार में महिला माननीयों की संख्या में बढ़ोतरी हो जाएगी।
सरकार की इस योजना के लागू हो जाने के बाद बिहार में सांसदों की संख्या 40 से बढ़ कर 60 हो जाएगी जिसमें 20 महिलाएं होंगी वहीं विधानसभा में सदस्यों की संख्या 243 से बढ़ कर 365 हो जाएगी जिसमें महिलाओं की संख्या 122 हो जाएगी। इस नए कानून के आने के बाद जीविका या अन्य राजनीतिक पार्टियों से जुडी आम महिलाओं को भी सदन में जाने का मौका मिल सकता है।
केंद्र सरकार के प्रस्ताव का महिला सांसदों ने स्वागत किया है और इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बेहतर कदम बताया। जदयू की सांसद लवली आनंद ने कहा कि एक तरफ बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं को काफी आगे बढ़ाया है तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की महिलाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इससे महिलाओं की भागीदारी राजनीति में बढ़ेगी और देश की प्रगति में तेजी आएगी। जब तक महिलाओं का विकास न हो तब तक असली विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है वहीं दूसरी तरफ सपा की सांसद इकरा हसन ने भी इस प्रस्ताव का स्वागत किया लेकिन उन्होंने कहा कि इसे लागू किये जाने से पहले इस पर स्पष्टता की जरूरत है। महिला आरक्षण लागू किया जाना काफी महत्वपूर्ण है लेकिन इसे कैसे लागू किया जायेगा यह सब देखने की जरूरत है।
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