पटना जिले के मोकामा में एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है, जिसने हर किसी को चौंका दिया है। JDU विधायक अनंत कुमार सिंह, जो कभी विवेका पहलवान के जानी दुश्मन थे, आज उसी के नाम पर अंतरराष्ट्रीय महा दंगल का आयोजन करा रहे हैं।
नदवां गांव में अंतरराष्ट्रीय महादंगल
शुक्रवार को मोकामा के नदवां गांव में इस भव्य महादंगल का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन विवेका पहलवान की पहली पुण्यतिथि के मौके पर रखा गया है। गांव में इसको लेकर उत्सव जैसा माहौल है और बड़ी संख्या में दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है।
देश-विदेश के पहलवान लेंगे हिस्सा
इस महादंगल की खास बात यह है कि इसमें भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों के पहलवान भी हिस्सा ले रहे हैं। ईरान के हामिद, इरफान और जलाल जैसे चर्चित पहलवान के साथ जॉर्जिया के टेड्डू पहलवान भी अखाड़े में उतरेंगे। इसके अलावा यूपी, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के पहलवान भी अपनी ताकत दिखाएंगे।

खास तरीके से तैयार हुआ अखाड़ा
दंगल के लिए नदवां गांव में विशेष अखाड़ा तैयार किया गया है। इसमें लाल मिट्टी मंगाकर उसमें हल्दी, नीम और सरसों का तेल मिलाया गया है। पारंपरिक तकनीक से तैयार इस अखाड़े को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया गया है, ताकि पहलवानों को बेहतर सुविधा मिल सके।
खूनी दुश्मनी की रही है लंबी कहानी
अनंत सिंह और विवेका पहलवान के बीच कभी गहरी दुश्मनी थी। वर्चस्व की लड़ाई में दोनों पक्षों के बीच कई बार गोलीबारी हुई। साल 2009 में अनंत सिंह पर AK-47 से हमला हुआ था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हमले में विवेका पहलवान का नाम सामने आया था।
रिश्तेदार से बने दुश्मन
दोनों के बीच दुश्मनी की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि वे आपस में रिश्तेदार थे। मोकामा के लदमा गांव में दोनों के घर पास-पास हैं और गांव की भाषा में ‘गोतिया’ माने जाते हैं। लेकिन वर्चस्व की लड़ाई ने रिश्तों को दुश्मनी में बदल दिया।
कैसे खत्म हुई दुश्मनी
समय के साथ हालात बदले और दोनों के बीच सुलह हो गई। बीच-बचाव और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद रिश्तों में नरमी आई और दुश्मनी खत्म हो गई। इसके बाद दोनों के संबंध सामान्य हो गए थे।
पुण्यतिथि पर बदलती तस्वीर
2025 में दिल का दौरा पड़ने से विवेका पहलवान का निधन हो गया। अब उनकी पहली पुण्यतिथि पर अनंत सिंह द्वारा कराया जा रहा यह महादंगल एक नई मिसाल बन गया है। यह आयोजन बताता है कि समय के साथ दुश्मनी भी सम्मान में बदल सकती है।
मोकामा का यह महादंगल सिर्फ कुश्ती का आयोजन नहीं, बल्कि बदलते रिश्तों और सामाजिक संदेश की एक बड़ी कहानी है। कभी खून के प्यासे रहे दो लोगों की कहानी आज सम्मान और याद में बदल गई है।




