कुछ खबरें सिर्फ पढ़ी नहीं जातीं, वे दिल में सवाल छोड़ जाती हैं—क्या हम अपने आसपास के दर्द को समझ पा रहे हैं? क्या समय रहते किसी की मदद की जा सकती थी? भोजपुर से आई यह खबर ऐसी ही एक कहानी है, जो सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि मानसिक बीमारी को को हल्का लेने पर क्या खामयाजा भुगतना पड़ सकता है उसकी दास्तान है। भोजपुर जिले के कृष्णगढ़ थाना क्षेत्र के छोटकी इटहना गांव में बुधवार को एक दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई। यहां एक व्यक्ति, जो पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान बताया जा रहा है, ने अपनी ही छह माह की मासूम बच्ची को हनुमान मंदिर में पटक दिया। इस घटना में बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई।
मृत बच्ची की पहचान धोबहा थाना क्षेत्र के पुरुषोत्तमपुर निवासी दीपांकर कुमार की छह माह की पुत्री आराध्या कुमारी के रूप में हुई। उसकी मां सुनती कुमारी ने बताया कि उसके पति की तबीयत करीब एक महीने से खराब चल रही थी और उसकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। इसी वजह से वह उसे छोटकी इटहना गांव स्थित औघड़ बाबा के पास दिखाने ले जाती थी।
बुधवार की शाम भी वह उसे दिखाने गई थी। उसी दौरान बच्ची ने शौच कर दिया, जिसके बाद वह उसे साफ करने लगी। तभी उसके पति ने बच्ची को गोद में उठा लिया। कुछ ही पल में जो हुआ, उसने सब कुछ बदल दिया—उसने अपनी ही बच्ची को मंदिर में पटक दिया। मां के सामने ही मासूम गंभीर रूप से घायल हो गई। घबराई मां तुरंत उसे इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल लेकर भागी, लेकिन रास्ते में ही बच्ची ने दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि सुनती कुमारी की शादी करीब तीन साल पहले हुई थी और आराध्या उनकी इकलौती संतान थी। इस घटना के बाद पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है—मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक हो सकता है। जरूरत है कि हम समय रहते ऐसे संकेतों को समझें और इलाज को प्राथमिकता दें। क्योंकि कई बार एक अनदेखी, एक लापरवाही, किसी मासूम की पूरी जिंदगी छीन लेती है।
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