जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में एक बार फिर नीतीश कुमार का दबदबा कायम रहा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए हुए सांगठनिक चुनाव में वह निर्विरोध चुने गए। इस चुनाव में नीतीश कुमार ही एकमात्र उम्मीदवार थे, जिसके बाद नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और नाम वापसी की समयसीमा खत्म होते ही उनकी जीत तय हो गई। चुनाव पदाधिकारी अनिल हेगड़े ने आधिकारिक तौर पर उनके अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की।
दोपहर 2:30 बजे जदयू कार्यालय में अनिल हेगड़े द्वारा नीतीश कुमार को जीत का प्रमाण पत्र सौंपा जाएगा। इस तरह एक बार फिर पार्टी की कमान उनके हाथों में आ गई है। जदयू के भीतर नीतीश कुमार की पकड़ पहले से ही मजबूत मानी जाती रही है, और इस चुनाव ने इसे और स्पष्ट कर दिया है। जदयू का गठन साल 2003 में कई दलों के विलय से हुआ था। इसमें जॉर्ज फर्नांडीस और नीतीश कुमार की समता पार्टी, शरद यादव के नेतृत्व वाला जनता दल धड़ा और रामकृष्ण हेगड़े की लोक शक्ति शामिल थी। तब से लेकर अब तक नीतीश कुमार कई बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं और संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ बनी रही है।
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पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह भी कई बार यह कह चुके हैं कि जदयू में अंतिम निर्णय नीतीश कुमार का ही होता है। उनके नेतृत्व में ही पार्टी ने बिहार की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव बनाए रखा। वहीं, नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका की ओर बढ़ रहे हैं। हाल ही में उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया है और वह जल्द ही संसद के ऊपरी सदन में शपथ लेंगे। यह उनका पहला राज्यसभा कार्यकाल होगा। इससे पहले वह लोकसभा और बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में अपनी भूमिका निभा चुके हैं।
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नीतीश कुमार का यह नया राजनीतिक कदम न सिर्फ उनके करियर में बदलाव का संकेत है, बल्कि जदयू की आगामी रणनीति को भी नई दिशा दे सकता है।




