नई दिल्ली: देश में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और परिसीमन में संशोधन विधेयक पर चर्चा और पेश किए जाने को लेकर केंद्र सरकार ने तीन दिनों की विशेष सत्र बुलाई थी। सत्र के दूसरे दिन विधेयक पर वोटिंग हुई जिसमें दोनों ही विधेयक पास नहीं हो सका। हालांकि वोटिंग के दौरान पक्ष में अधिक वोट जरूर मिले लेकिन दो तिहाई बहुमत नहीं होने की वजह से विधेयक सदन में गिर गया। विधेयक पर वोटिंग के लिए सदन में कुल 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया था जिसमें 352 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी। मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े जबकि विपक्ष में 230 सांसदों ने वोट किया।
विपक्ष ने नहीं किया महिलाओं का सम्मान
सदन में विधेयक गिरने के बाद सरकार ने कहा कि विपक्ष ने महिलाओं को अधिकार और सम्मान देने का एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया है। वहीं विपक्ष ने कहा यह विधेयक संविधान पर आक्रमण था।, जिसे विपक्षी दलों ने रोक दिया। महिला आरक्षण विधेयक पास नहीं होने के कारण इससे जुड़े परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026 को भी आगे नहीं बढ़ाया का सकता। इसके बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजीजू ने कहा कि महिलाओं को अधिकार और सम्मान देने वाले विधेयक का सम्मान विपक्ष ने नहीं किया।, यह बहुत खेद की बात है।
सत्ता पक्ष ने विपक्ष की मंशा पर खड़े किए सवाल
तीनों विधेयक पर सदन में दो दिन चर्चा हुई और इस दौरान विपक्ष के सवालों पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश की महिलाएं देख रहीं हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है और उन्हें महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। सदन में विधेयक गिरने के बाद सत्ता पक्ष की महिला सदस्यों ने विपक्ष के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। महिला सदस्य एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन की मंशा को करोड़ों देशवासियों ने देख लिया है। भारत की महिलाएं उन्हें करारा जवाब देगी। वहीं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि देश की जनता विपक्ष से एक एक पैसे का हिसाब लेगी।
संविधान पर आक्रमण हुआ नाकाम
सदन में महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक संविधान पर आक्रमण था जिसे हमने नाकाम कर दिया है। अगर पीएम मोदी महिला आरक्षण लागू करना चाहते हैं तो 2023 में पारित कानून को लागू करें, जिसमें विपक्ष का पूरा सहयोग रहेगा। वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि यह महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा नहीं बल्कि लोकतंत्र से जुड़ा था। महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना गलत है, इसलिए इस विधेयक का पास होना संभव नहीं था। उन्होंने इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया और सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग हाथरस, उन्नाव और मणिपुर जैसे मामलों में कार्रवाई नहीं कर सके, वहीं लोग अब महिला अधिकारों की बात कर रहे हैं।




