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NEET छात्रा मामला: SI रौशनी कुमारी की लापरवाही पर उठे सवाल, 3 दिन तक छूटा घटनास्थल

थाना प्रभारी की चौंकाने वाली लापरवाही, तीन दिन तक रह गया हॉस्टल खाली

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NEET छात्रा मामला: SI रौशनी कुमारी की लापरवाही पर उठे सवाल, 3 दिन तक छूटा घटनास्थल- फोटो : Darsh News

पटना में NEET छात्रा के रेप और मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। खबरों के अनुसार, थाना प्रभारी SI रौशनी कुमारी को उनके काम में लापरवाही मिलने के बाद सस्पेंड कर दिया गया है। इस मामले में SI के प्राइवेट ड्राइवर से बातचीत के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। ड्राइवर ने बताया कि घटना के दिन SI रौशनी कुमारी गांधी मैदान में एक मीटिंग में थीं। तभी कदमकुआं थाना से फोन आया कि उनके इलाके में गंभीर वारदात हुई है। वो अस्पताल तो पहुंची, लेकिन हॉस्टल का पता उन्हें नहीं था। ड्राइवर ने अपने दोस्तों की मदद से हॉस्टल का पता लगाया और सबसे पहले वहां पहुंचे। गेट खुलवाने में काफी समय लगा और इसके बाद ही DVR को थाने ले जाया गया। ड्राइवर ने साफ कहा कि फोरेंसिक टीम या एक्सपर्ट वहां नहीं पहुंचे।



पड़ताल में यह भी पता चला कि SI रौशनी कुमारी घटना स्थल पर तीन दिन तक नहीं पहुंचीं। SIT जांच के दौरान उनका वीडियो सामने आया, जिसमें वह जांच करती नजर आ रही थीं, जबकि SIT का हिस्सा नहीं थीं। इस मामले में तीन दिन का गैप होने से सबूतों के छेड़छाड़ की आशंका भी जताई जा रही है। पुलिस अब कुछ संभावनाओं पर जांच कर रही है। पहली संभावना यह है कि छात्रा पटना आने से पहले कैसी स्थिति में थी? मोबाइल कॉल डिटेल, टावर लोकेशन और स्टेशन CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। दूसरी संभावना यह है की छात्रा के हॉस्टल पहुंचने के बाद किन लोगों से संपर्क हुए, यह पता लगाया जा रहा है। छात्रा 3:35 बजे हॉस्टल पहुंची और शाम तक मेडिकल दुकान पहुंची, यानी चार-पांच घंटे का गैप।



तीसरी संभावना में यह जांच की जा रही है कि अपराध हॉस्टल के भीतर हुआ या बाहर। पोस्टमॉर्टम और डॉक्टरों की रिपोर्ट में चोट और खरोंच के निशान दर्ज हैं। हॉस्टल के पीछे के गेट और लिंक रोड को विशेष जांच में लिया गया है। चौथी संभावना यह है कि छात्रा ने अपने करीबी व्यक्ति से कई बार बातचीत की थी। पुलिस यह देख रही है कि यह सामान्य बातचीत थी या किसी तरह का मानसिक दबाव। इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई और जांच की गति पर सवाल उठ रहे हैं। SI रौशनी कुमारी की लापरवाही ने न केवल जांच प्रक्रिया को प्रभावित किया, बल्कि न्याय की उम्मीद में खलल डाला।


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