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गोबर से गैस, तालाब से तरक्की, जो पंचायत जलभराव से जूझती थी, वही आज बनी मॉडल, पढ़ें...

गोबर से गैस, तालाब से तरक्की, जानिए कैसे मोतीपुर बन गया बिहार की आदर्श पंचायत। जो पंचायत जलभराव से जूझती थी, वही आज बनी मॉडल पंचायत, मोतीपुर की चौंकाने वाली कहानी। पशुपालकों के घर बायोगैस प्लांट का निर्माण। एक एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली पोषण...

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गोबर से गैस, तालाब से तरक्की, जो पंचायत जलभराव से जूझती थी, वही आज बनी मॉडल, पढ़ें...- फोटो : Darsh NEWS

एक एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली पोषण और औषधीय वाटिका। शहरों की तर्ज पर सुविधाजनक हाट। जलवायु परिवर्तन पर उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रधानमंत्री से सम्मानित

समस्तीपुर: समस्तीपुर जिले के रोसड़ा प्रखंड में स्थित मोतीपुर ग्राम पंचायत आज बिहार के आदर्श मॉडल पंचायतों में शुमार है। यहां गोबर गैस प्लांट से लेकर पोषण वाटिका तक के प्रयासों ने ग्रामीण जीवन की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। 2016 में मुखिया बनने के बाद प्रेमा देवी ने पंचायत की मूलभूत समस्याओं पर काम करना शुरू किया। पहले यहां गर्मियों में तालाब सूख जाते थे। जलभराव और खराब ड्रेनेज से लोगों को भारी परेशानी होती थी। उन्होंने मनरेगा, 15वें वित्त आयोग जैसी सरकारी योजनाओं के साथ ग्रामीणों की जनभागीदारी से आधारभूत ढांचे को मजबूत किया। आज पंचायत के हर घर तक पेयजल, पक्की नलियां, सड़कें, आवास, बिजली, शौचालय पहुंच चुके हैं। उज्ज्वला योजना, बुजुर्गों, दिव्यांगों व विधवाओं के लिए पेंशन और गरीबों को राशन कार्ड जैसी सुविधाएं शत-प्रतिशत उपलब्ध कराई गईं हैं। प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम ने जलभराव और गंदे पानी से होने वाली बीमारियों को लगभग खत्म कर दिया है। 

जलवायु परिवर्तन के दौर में जल संचयन पर काम 

मुखिया ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भी ठोस कदम उठाए गए हैं। अमृत सरोवर, सार्वजनिक और निजी तालाबों का निर्माण व नवीनीकरण किया गया, जिससे कुल 11 एकड़ से अधिक क्षेत्र में जल संचयन हुआ। दो दर्जन से ज्यादा निजी तालाब, सोख्ते और सरकारी भवनों में वर्षा जल संचयन संरचनाएं भी बनीं। भूजल स्तर में सुधार से किसान अब साल में दो फसलें उगा रहे हैं, मत्स्य पालन और पशुओं को पानी मिल रहा है। इसके अलावा सरोवरों के आसपास मियावाकी(जर्मन तकनीक) से वृक्षारोपण कर क्षेत्र को हरा-भरा और ठंडा बनाया गया है। एक लाख से अधिक पौधे लगाए गए। गोवर्धन योजना के तहत एक सार्वजनिक और सभी पशुपालकों के घरों में निजी बायोगैस (गोबर गैस) प्लांट स्थापित किए गए हैं। इससे खाना पकाने में एलपीजी की लागत शून्य करने की दिशा में मजबूत प्रगति हुई है। जैविक कम्पोस्ट से रासायनिक खाद पर निर्भरता घटी, खेती की लागत कम हुई और किसान आत्मनिर्भर बने है।

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पोषण वाटिका से बुजुर्गों व बच्चों को लाभ

एक एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली पोषण वाटिका में 25 प्रकार के फलदार पौधे और 40 प्रकार के औषधीय पौधे लगाए गए हैं। 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों और छोटे बच्चों को निःशुल्क फल वितरित किए जाते है।

शहर की तर्ज पर हाट

शहरों की तर्ज पर सुविधाजनक मॉडल ग्रामीण हाट बनाया गया, जहां ताजे फल-सब्जी का बाजार है और करीब 350 परिवारों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। आसपास की पंचायतों को भी इससे लाभ हो रहा है। इसके साथ ही सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लास, सोलर पैनल और चिल्ड्रेन पार्क बनाए गए, जिससे ड्रॉपआउट दर में कमी आई है।

पुरस्कार और सम्मान से बदली तस्वीर

प्रेमा देवी के इन दूरदर्शी प्रयासों को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। वर्ष 2020 में उन्हें नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार, 2023 में स्वास्थ्य पंचायत पुरस्कार और 2025 में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु अनुकूल योजनाओं के लिए क्लाइमेट एक्शन स्पेशल पंचायत अवार्ड दिया गया। इसके तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से 50 लाख रुपये का पुरस्कार मिला, जिसे उन्होंने मुक्तिधाम, बायोगैस प्लांट और पोषण वाटिका के विस्तार में लगाया। मोतीपुर आज सिर्फ एक पंचायत नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए प्रेरणा का जीवंत प्रतीक बन चुका है, जहां महिला नेतृत्व, जनसहयोग और सतत विकास ने ग्रामीण परिवेश की पूरी परिभाषा बदल दी।

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