बिहार में इंटरमीडियट परीक्षा का परिणाम घोषित होने के कगार पर है, लेकिन इससे पहले ही साइबर ठगों ने छात्रों और उनके परिजनों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। मधेपुरा जिले में एक छात्रा के पिता को फोन करके 4,000 रुपये की रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। कॉल करने वाले ने खुद को बिहार बोर्ड का कर्मचारी बताते हुए छात्रा के पूरे विवरण का हवाला दिया।
जानकारी के अनुसार, कॉलर ने छात्रा के नाम, परीक्षा में प्राप्त नंबर और फेल होने वाले विषयों की जानकारी दी। उसने कहा कि छात्रा भूगोल और होम साइंस में फेल हो रही है और कुल 155 नंबर प्राप्त हुए हैं। कॉल करने वाले ने दावा किया कि यदि 4,000 रुपये भेज दिए जाएँ, तो छात्रा को पास कर दिया जाएगा और उसे 350 नंबर मिल जाएंगे। खुद को गौरव नाम बताने वाले कॉलर ने इतना भी कहा कि रिजल्ट आने के बाद भी वह फिर कॉल करेगा।
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छात्रा के भाई वरुण कुमार ने एक मीडिया हाउस को बताया कि कॉल 21 मार्च को दोपहर के समय आई। कॉल करने वाले ने उनके साले का नंबर लेकर संपर्क किया और छात्रा की परीक्षा से संबंधित विषयों और अंक तक की सही जानकारी दी। परिजन इस बात से हैरान हैं कि यदि कॉलर बोर्ड का कर्मचारी नहीं है, तो साइबर ठगों के पास छात्रा के सटीक आंकड़े कैसे पहुँच गए।
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छात्रा के परिवार ने कहा कि वे इस मामले में बिहार बोर्ड में शिकायत दर्ज करेंगे। वहीं, बिहार बोर्ड (बीएसईबी) की ओर से कहा गया है कि इंटरमीडियट परीक्षा का परिणाम जल्द ही घोषित किया जाएगा और इस वर्ष 13 लाख से अधिक छात्रों ने परीक्षा में भाग लिया। परीक्षा 2 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक राज्य के 1762 केंद्रों पर संपन्न कराई गई थी। बोर्ड ने परीक्षा को कदाचार मुक्त संपन्न कराने का दावा किया था।
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बोर्ड ने यह भी बताया कि टॉपरों की कॉपियों की पुनः जांच की जा रही है। परीक्षार्थियों और उनके परिजनों से अपील की गई है कि रिजल्ट से पहले किसी भी फोन कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें और यदि कोई अवैध मांग करता है तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि छात्रों और उनके अंक-संबंधी डेटा की सुरक्षा किस हद तक सुनिश्चित है। साइबर ठगी के इस मामले में जांच जारी है, और बोर्ड ने कहा है कि सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।
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