पटना: मैट्रिक परीक्षा में सिर्फ 10 मिनट की देरी एक छात्रा की जिंदगी पर भारी पड़ गई। मसौढ़ी के खरजमा की रहने वाली छात्रा का परीक्षा केंद्र बरनी में था। मंगलवार, 17 फरवरी को वह थोड़ी देर से पहुंची तो उसे गेट पर ही रोक दिया गया। उसने गेट खुलवाने की काफी कोशिश की, मिन्नतें कीं, लेकिन प्रवेश नहीं मिला। मायूस होकर वह घर लौटी, फिर नदौल स्टेशन पहुंची और ट्रेन पर सवार हो गई। तरेगना और मसौढ़ी कोर्ट के बीच महराजचक गांव के पास चलती ट्रेन से कूद गई। पुलिस उसे अस्पताल ले गई, जहां उसने दम तोड़ दिया।
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पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि मामूली देरी पर छात्रों को परीक्षा से वंचित करना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में कई बार सरकार से आग्रह के बावजूद स्पष्ट निर्देश जारी नहीं हुए, और हर दिन कई छात्र-छात्राएं परीक्षा नहीं दे पा रहे हैं। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि सरकार ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने विधानसभा परिसर के बाहर कहा कि छात्रों के हित में जो भी जरूरी कार्रवाई होगी, वह की जाएगी और मामले की समीक्षा की जाएगी।
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करीब 15 दिन बाद सदन पहुंचे तेजस्वी यादव ने भी कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार महिलाओं के लिए “काल” बन गई है और आज सदन में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष को घेरेंगे। इसी बीच हाई कोर्ट से 42 विधायकों को नोटिस मिलने के मामले पर अजय कुमार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नोटिस का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान चुनाव आयोग पर सवाल उठना स्वाभाविक है और SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) पूरे राज्य में एक साथ लागू होना चाहिए था। मसौढ़ी की इस घटना ने परीक्षा व्यवस्था और मानवीय संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।